अध्याय 109

अबिगेल अपने फोन को घूर रही थी। स्टैंटन ग्रुप की लगातार आई दो घोषणाएँ पढ़ते ही उसके चेहरे पर विजय-सी मुस्कान फैल गई।

“तलाक? सच में तलाक हो गया! ये तो कमाल की खबर है, बिल्कुल मज़ेदार,” उसने उछलकर कहा, उसकी आवाज़ में गहरी तृप्ति झलक रही थी।

“तुम किस बात की बात कर रही हो, अबिगेल?” लूसी कमरे में दाखिल ...

लॉगिन करें और पढ़ना जारी रखें